Friends

On Friends and Friendship. And what one shares with them.

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Some thoughts on Languages – Part I

Former Vice-president Hamid Ansari, in a speech just after his retirement, commented that nowadays, Urdu is associated with Muslims which is what has caused its reduced usage. Surely, the undertones of his statement should be seen in the context of present day political landscape. However, when I read this report, I was reminded of my … Continue reading Some thoughts on Languages – Part I

भाषाओं पर कुछ विचार – १

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपनी सेवानिवृत्ति के पश्चात दिए एक वक्तव्य में उर्दू भाषा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आजकल इसे मुस्लिमों से जोड़कर से जोड़कर देखा जाता है और यही इसके घटते प्रचलन का कारण है। निश्चित तौर पर उनकी इस टिप्पणी के निहितार्थ वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य के संदर्भ में है। परंतु … Continue reading भाषाओं पर कुछ विचार – १

पतझड़ का संदेश

इन सूखी कड़कड़ाती पत्तीयों के बीच, इन पतली चटकती टहनियों के बीच, जो हवा चुपचाप सरसराती है, वो अपनी खामोशी में भी एक संदेश सुनाती है। हमें नहीं होती आशा जिसकी, ऐसा कुछ वो कहती है, ये धरती हमेशा पीली नहीं रहेगी, ऐसा ही कुछ तो गुनती है। कि शरद स्वयं भीे जानता है, जब … Continue reading पतझड़ का संदेश